Wednesday, August 18, 2010

मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर भले 10वी में फेल हो गए हों लेकिन क्रिकेट के खेल में उन्होंने पीएचडी कर रखी है,इसमें संदेह नहीं है। क्रिकेट के भगवान का दर्जा पा चुके सचिन रमेश तेंदुलकर को अब आंध्र विश्वविद्यालय डॉक्टरेट की मानद उपाधि देने की योजना बना रहा है।

आंध्र विश्वविद्यालय के कुल सचिव पीवीजीडी प्रसाद रेड्डी के मुताबिक पांच दिसम्बर को विश्व विद्यालय के 76वें दीक्षांत समारोह के दौरान सचिन को यह उपाधि प्रदान करने का प्रस्ताव है।

समारोह को मुख्य न्यायाधीश केजी बालाकृष्णन संबोधित करेंगे। उन्होंने बताया कि इस बाबत प्रस्ताव को विश्व विद्यालय कुलपति एवं राज्यपाल एनडी तिवारी के समक्ष मंजूरी के लिए रखा गया है। प्रस्ताव में जीएमआर प्रमुख जी मिल्लीकार्जुन राव और एक शिक्षाविद का नाम भी है।



सचिन तेंदुलकर की महानता को नकारने वाले लोगों के लिए एक और पोस्ट। इस बारे में पहले ही दो पोस्ट डाल चुका हूं। इस बार सिर्फ आंकड़ों का आइना उठाकर लाया हूं। चलिए, अब आपको आंकड़ों की दुनिया में ले चलते हैं। शायद आंकड़ों की भाषा सचिन के आलोचकों को अच्छे से समझ में आ जाए। आलोचकों का कहना है कि सचिन ने कोई विश्वकप नहीं जिताया। हां, वे ठीक कहते हैं सचिन ने कभी विश्वकप नहीं जिताया। इसका मतलब यह नहीं कि सचिन ने इसके लिए प्रयास नहीं किया। इसलिए ही मैं उन्हें याद दिलाना चाहता हूं विश्वकप 2003 की। इस विश्वकप के फाइनल में भारत की हार हुई थी, आस्ट्रेलिया के हाथों। पता है क्यों? क्योंकि इस मैच में सचिन तेंदुलकर नहीं चले थे।
(श्री सुधीर जी, आपकी नजर में महान बल्लेबाज उस मैच में टीम की ओर से हाईएस्ट स्कोर करने के बाद भी जिता नहीं पाया था, जिसकी आप बार-बार दुहाई देते हैं।)
मैं आपको भारत का एक-एक मैच करके याद दिलाना चाहूंगा।

विश्वकप का मैच नंबर- सातवां
भारत का मैच- पहला
विरोधी टीम- नीदरलैंड
परिणाम- भारत की 68 रन से जीत
कुल स्कोर भारत- 204
सचिन का स्कोर- 52 रन, टीम में हाईएस्ट स्कोर
वीरेंद्र सहवाग- 8, सौरव गांगुली- 6
सार : पहले ही मैच में सचिन तेंदुलकर ने अर्धशतक जमाया, जबकि बाकी सब दिग्गज फ्लॉप रहे।
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विश्वकप का मैच नंबर- 11वां
भारत का मैच- दूसरा
विरोधी टीम- आस्ट्रेलिया
परिणाम- आस्ट्रेलिया 9 विकेट से जीता
कुल स्कोर भारत- 125
सचिन का स्कोर- 36 रन, टीम में हाईएस्ट स्कोर
वीरेंद्र सहवाग- 4, सौरव गांगुली- 9
सार : दूसरे मैच में इंडिया की ओर से केवल 125 रन बने, जिसमें हाईएस्ट सचिन के ही थे। बाकी दिग्गज फिर फ्लॉप रहे। सचिन नहीं चले तो मैच भी गया।
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विश्वकप का मैच नंबर- 17वां
भारत का मैच- तीसरा
विरोधी टीम- जिम्बावे
परिणाम- भारत 83 रन से जीता
कुल स्कोर भारत- 255
सचिन का स्कोर- 81 रन, टीम में हाईएस्ट स्कोर
वीरेंद्र सहवाग- 36, सौरव गांगुली- 24
सार : तीसरे मैच में भी सचिन का स्कोर ही हाईएस्ट रहा, भारत जीता। सहवाग तीसरे मैच तक पचास का आंकड़ा भी छू नहीं पाया।
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विश्वकप का मैच नंबर- 25वां
भारत का मैच- चौथा
विरोधी टीम- नाबिबिया
परिणाम- भारत 181 रन से जीता
कुल स्कोर भारत- 311
सचिन का स्कोर- 152 रन, टीम में हाईएस्ट स्कोर
सौरव गांगुली- 112, वीरेंद्र सहवाग- 24
सार : सचिन ने डेढ़ सौ से अधिक रन बनाए। इस बार भी सचिन ही हाईएस्ट स्कोरर। भारत जीता। हालांकि सौरव गांगुली की पारी भी काफी अच्छी थी। सहवाग चौथे मैच में भी फिर फेल।
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विश्वकप का मैच नंबर- 30वां
भारत का मैच- पांचवां
विरोधी टीम- इंग्लैंड
परिणाम- भारत 82 रन से जीता
कुल स्कोर भारत- 250
सचिन का स्कोर- 50 रन,
राहुल द्रविड़- 62, वीरेंद्र सहवाग- 23
सार : पांचवें मैच में सचिन का पचासा। इस बार हाईएस्ट बनाए राहुल द्रविड़ ने। सहवाग पांचवें मैच तक भी पचासा नहीं मार पाया।
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विश्वकप का मैच नंबर- 36वां
भारत का मैच- छठवां
विरोधी टीम- पाकिस्तान
परिणाम- भारत 6 विकेट से जीता
कुल स्कोर भारत- 276
सचिन का स्कोर- 98 रन, टीम में हाईएस्ट स्कोर
वीरेंद्र सहवाग- 21, सौरव गांगुली- 0
सार : पाकिस्तान के खिलाफ सचिन ने ही हाईएस्ट रन बनाए। शोएब अख्तर का बयान- "सचिन ने पहले 15 ओवरों में ही मैच हमसे छीन लिया था।"
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विश्वकप का मैच नंबर- 44वां, सुपर सिक्स
भारत का मैच- सातवां
विरोधी टीम- कीनिया
परिणाम- भारत 6 विकेट से जीता
कुल स्कोर भारत- 226
सचिन का स्कोर- 5 रन
सौरव गांगुली- 112, टीम में हाईएस्ट, वीरेंद्र सहवाग- 3
सार : सचिन नहीं चले। सौरव गांगुली की शानदार पारी। यदि गांगुली भी नहीं चलते तो मैच में हार लगभग तय थी। वीरेंद्र सहवाग एक बार फिर नाकाम। अभी तक सहवाग का हाईएस्ट 36 रन।
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विश्वकप का मैच नंबर- 46वां, सुपर सिक्स
भारत का मैच- आठवां
विरोधी टीम- श्री लंका
परिणाम- भारत 183 रन से जीता
कुल स्कोर भारत- 292
सचिन का स्कोर- 97 रन, टीम में हाईएस्ट
वीरेंद्र सहवाग- 66, सौरव गांगुली- 48
सार : श्री लंका के खिलाफ जीत। हाईएस्ट फिर से सचिन के नाम। सहवाग ने आठवें मैच में पचासा किया। बधाई।
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विश्वकप का मैच नंबर- 49वां, सुपर सिक्स
भारत का मैच- नौवां
विरोधी टीम- न्यू जीलैंड
परिणाम- भारत 7 विकेट से जीता
कुल स्कोर भारत- 150
सचिन का स्कोर- 15 रन
मोहम्मद कैफ- 68, टीम में हाईएस्ट, वीरेंद्र सहवाग- 1
सार : भारत के सामने छोटा लक्ष्य। सचिन नहीं चले। वीरेंद्र सहवाग फ्लॉप। मोहम्मद कैफ की सधी पारी।
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विश्वकप का मैच नंबर- दूसरा सेमीफाइनल
भारत का मैच- दसवां, सेमीफाइनल
विरोधी टीम- कीनिया
परिणाम- भारत 91 रन से जीता
कुल स्कोर भारत- 270
सचिन का स्कोर- 83 रन
सौरव गांगुली- 111, टीम में हाईएस्ट, वीरेंद्र सहवाग- 33
सार : सेमीफाइनल मैच में गांगुली और सचिन की बदौलत जीत। वीरेंद्र सहवाग का फ्लॉप शो जारी।
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विश्वकप का मैच नंबर- फाइनल
भारत का मैच- अंतिम
विरोधी टीम- आस्ट्रेलिया
परिणाम- भारत 125 रन से हारा
कुल स्कोर भारत- 234
सचिन का स्कोर- 4 रन
वीरेंद्र सहवाग- 82, टीम में हाईएस्ट, राहुल द्रविड़- 47
सार : आलोचक कहते हैं सचिन के बिना भी टीम जीत जाती। फाइनल में सचिन नहीं चले तो भारत को शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा। वीरेंद्र सहवाग की सिरीज में दूसरी फिफ्टी।
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इस रिकॉर्ड को देखने के बाद यह नहीं कहा जा सकता कि सचिन ने विश्वकप जिताने के लिए कोशिश नहीं की। उसने वही किया जो हर खिलाड़ी करना चाहता है। सचिन ने कभी खुद को भगवान नहीं कहा। वे कह भी चुके हैं कि वे भगवान नहीं हैं। जिस दिन भारत का मैच हो, उस दिन सरकारी और निजी ऑफिसेज में काम रुक जाता है, क्योंकि क्रिकेट अब यहां किसी धर्म से कम नहीं रहा। हर बच्चा बोलना बाद में सीखता है, गेंद और बल्ला पहले उठा लेता है। इसलिए ही उनके सामने एक उदाहरण रखा जाता है सचिन तेंदुलकर का, ताकि बच्चे सचिन की तरह सफलता की सीढ़ी चढ़ पाएं। लोगों को अँधेरे क्रिकेट मैचों में एक आशा कि किरण नजर आती थी, जिसे सचिन तेंदुलकर के नाम पर जाना जाता था। इसलिए उन्हें महान कहा जाता है। चूंकि, क्रिकेट केवल भारत में ही धर्म समान है, इसलिए सचिन को भगवान भी कह दिया गया।
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सितारों की कहानी सितारों की जुबानी


सचिन तेंदुलकर
सितारों की कहानी सितारों की जुबानी स्तंभ में हम जन्मपत्रियों के विश्लेषण के आधार पर यह बताने का प्रयास करेंगे कि कौन से ग्रह योग किसी व्यक्ति को सफलता के शिखर तक ले जाने में सहायक होते हैं। यह स्तंभ जहां एक ओर ज्योतिर्विदों को ग्रह योगों का व्यावहारिक अनुभव कराएगा, वहीं दूसरी ओर अध्येताओं को श्रेष्ठ पाठ प्रदान करेगा तथा पाठकों को ज्योतिष की प्रासंगिकता, उसकी अर्थवत्ता तथा सत्यता का बोध कराने में मील का पत्थर साबित होगा।

अपने बीस साल के लंबे कैरियर में सचिन ने यह बात साबित कर दी है कि क्रिकेट के मौजूदा दौर में वह बेनजीर हैं। इस दौरान उन्होंने अनेक रिकॉर्ड तोड़े, अनेक खड़े किए। अभी उनके बल्ले की धार पैनी है - उन्हें कहां तक ले जाएगी यह समय के गर्भ में है। लेकिन फिर यह सचिन के साथ ही क्यों? मैदान में तो और भी एक से एक खिलाड़ी हैं, उनके साथ क्यों नहीं? जिज्ञासा स्वाभाविक है - कैसे? आइए, जानें प्रस्तुत आलेख में...

पाकिस्तान के कराची स्टेडियम में जब एक 15 वर्षीय बालक भारत व पाकिस्तान के मध्य खेले जा रहे टेस्ट मैच में खेलने के लिए उतरा, तो किसी ने सोचा भी नहीं था कि वह इस युग का महानतम क्रिकेट खिलाड़ी बनेगा। सचिन तेंदुलकर ने क्रिकेट में इतने अधिक कीर्तिमान स्थापित कर दिए हैं कि उन्हें सचिन रमेश तेंदुलकर की बजाय सचिन रिकॉर्ड तेंदुलकर कहें तो इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। इन्हें क्रिकेट का शाहंशाह, क्रिकेट का भगवान आदि नामों से भी जाना जाता है। क्रिकेट जगत में इनकी लोकप्रियता स्वाभाविक है।

टेस्ट मैचों में सर्वाधिक शतक ठोकने का रिकॉर्ड तेंदुलकर के नाम है। तेंदुलकर न केवल टेस्ट क्रिकेट में, अपितु एक दिवसीय क्रिकेट में भी सर्वश्रेष्ठ हैं। मौजूदा दौर के खिलाड़ियों में समस्त विश्व से केवल एक नाम जो ब्रैडमैन एकादश में शामिल है वह सचिन रमेश तेंदुलकर का है। अभी हाल ही में आस्ट्रेलिया के विरुद्ध खेलते हुए तेंदुलकर ने क्रिकेट में 20 वर्षों के लंबे कैरियर को पूरा करते हुए एक और शतक बनाकर एक दिवसीय क्रिकेट में 17000 रनों का विशाल पहाड़ खड़ा करके यह साबित कर दिया कि अभी भी उनके अंदर काफी लंबे समय तक क्रिकेट खेलने की क्षमता है। सबसे अधिक शतकों व रनों के अतिरिक्त 90 से 99 रनों के बीच सबसे अधिक रन बनाने का रिकॉर्ड भी इन्हीं के नाम है। एक दिवसीय मैचों में इन्हें 56 बार मैन ऑफ द मैच का पुरस्कार मिला जो एक रिकॉर्ड है। इन्हें सर्वाधिक 14 बार मैन ऑफ द सीरीज चुना गया। मैन ऑफ द मैच में सर्वाधिक औसत का रिकॉर्ड इन्हीं के नाम है। सचिन एक दिवसीय क्रिकेट में 10,00015000 रनों का आंकड़ा पार करने वाले विश्व के पहले खिलाड़ी हैं। 2007 के विश्व कप में इन्होंने सर्वश्रेष्ठ औसत 59.87 से सर्वाधिक 1796 रन बनाए। उन्हें विश्व कप में सब से अधिक मैन ऑफ द मैच का पुरस्कार मिला। 1996 के विश्व कप में इन्होंने 87.16 की औसत से सर्वाधिक 523 रन और फिर 2003 के विश्व कप में सर्वाधिक 673 रन बनाए। 2003 के विश्व कप में तो इन्हें सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी का पुरस्कार भी मिला। एक दिवसीय मैचों में सब से अधिक अर्द्ध शतकों का रिकॉर्ड भी इन्हीं के नाम है।

इस तरह, टेस्ट क्रिकेट के सर्वोच्च सम्मान, उपलब्धियां व रिकॉर्ड सचिन ने अपने नाम कर लिए। सचिन तेंदुलकर की लंबी रिकार्ड बुक पर नजर डालें तो बहुत आश्चर्य होता है। गत 20 नवंबर 2009 को सचिन ने 43 वां टेस्ट शतक बनाकर वन डे और टेस्ट मैचों में रनों के योग को 30,000 तक पहुंचाकर एक नया आसमान छू लिया। इतनी प्रतिभा, इतना सम्मान, इतनी लोकप्रियता कैसे? आइए जानें ज्योतिष के आइने से...

सचिन रमेश तेंदुलकर का जन्म 21 अप्रैल 1973 को मुंबई में हुआ। लग्न कन्या है, जो प्रतियोगिता, परीक्षा व खेल जगत में सफलता के लिए उत्तम माना गया है। पराक्रमेश मंगल का उच्च राशि में होना विशेष महत्वपूर्ण है, क्योंकि मंगल स्वयं पराक्रम का नैसर्गिक कारक ग्रह होता है। मंगल की इस स्थिति के फलस्वरूप तेंदुलकर को खेल में अपना उत्कृष्ट पराक्रम दिखाने में सफलता मिली।

सचिन तेंदुलकर की अद्वितीय प्रतिभा का कारण उनकी कुंडली में अष्टम भाव के राजयोग का होना है। कुंडली में अष्टम भाव में शुभ ग्रह शुक्र व उच्च राशिस्थ सूर्य के स्थित होने के अतिरिक्त अष्टमेश अष्टम भाव पर दृष्टि डाल रहा है। अष्टमेश स्वयं भी उच्च राशिस्थ है। अष्टम भाव से संबंधित सभी पक्षों के पूर्णतया बली व सकारात्मक होने के कारण इनके अंदर गुप्त व ईश्वरीय शक्ति विद्यमान है, जिसके फलस्वरूप इनमें अद्वितीय प्रतिभा व अद्भुत ऊर्जा का समावेश हो गया, क्योंकि ज्योतिष में अष्टम भाव को गुप्त शक्ति का स्रोत माना जाता है।

अष्टम भाव के अतिरिक्त अष्टम से अष्टम अर्थात तृतीय भाव का स्वामी भी उच्च राशिस्थ अष्टमेश मंगल ही है। अष्टम (गुप्त शक्ति) व तृतीय भाव (पराक्रम) का बली होना ही इनकी सफलता का सबसे बड़ा कारक है। ज्योतिष में सिद्धांत है कि मंगल और गुरु की युति जातक को लौहपुरुष बना देती है। इनकी कुंडली के पंचम भाव में मंगल और गुरु की युति होने के फलस्वरूप इन्हें शारीरिक क्षमता के साथ-साथ मानसिक व आत्मिक बल प्रदान कर रही है।

तेंदुलकर ने अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में सन्‌ 1989 में कदम रखा, जब उन पर दशम भाव में स्थित केतु की दशा प्रभावी थी। वर्ष के उत्तरार्द्ध में दशम भाव व इसमें स्थित केतु पर शनि व गुरु का गोचरीय प्रभाव आ जाने से इन्हें विशेष सम्मान व ख्याति मिली। वर्ष 1990 में भी इसी प्रकार का ग्रह योग बना रहा, जिसके परिणाम स्वरूप इन्होंने टेस्ट क्रिकेट में अपना पहला शतक बनाया।

आत्मा के स्थिर कारक सूर्य तथा चर कारक मंगल के उच्च राशिस्थ होने के फलस्वरूप तेंदुलकर मानसिक रूप से विशेष ऊर्जावान व पराक्रमी हैं। जनवरी 1991 से इन पर द्वितीयेश व भाग्येश शुक्र की महादशा प्रारंभ हुई, जो अष्टम भाव में उच्च राशिस्थ अष्टमेश से दृष्ट है तथा धन भाव को देख रहा है। सूर्य और मंगल की सहायता से यह शुक्र अष्टम भाव के राजयोग का निर्माण कर रहा है। ज्योतिष में सिद्धांत है कि जो भाव अपने स्वामी ग्रह या शुभ ग्रह से युक्त वा दृष्ट हो, अथवा उच्च राशिस्थ ग्रह से युक्त हो, उस भाव की वृद्धि होती है। इस प्रकार शुभ ग्रह शुक्र ने इनकी तकनीकी व शैली को और अधिक परिष्कृत कर दिया।

अष्टम भाव का राजयोग जातक को ऐश्वर्यशाली भी बनाता है। दशानाथ शुक्र की धनेश होकर धन भाव पर दृष्टि के फलस्वरूप तेंदुलकर को शुक्र की दशा में प्रचुर मात्रा में धन लाभ होता रहा। शुक्र की यह दशा उन पर अभी जनवरी 2011 तक चलती रहेगी। नवंबर 2011 के बाद इनके धन भाव, धनेश, भाग्येश व सूर्य पर गोचरीय गुरु और शनि का संयुक्त प्रभाव होगा। इस प्रकार उस समय इन्हें और भी अधिक धन लाभ होगा। साथ ही इन पर विपरीत राजयोग कारक उच्च राशिस्थ सूर्य की महादशा भी प्रारंभ होगी, जो इन्हें अक्षय कीर्ति प्रदान करेगी।

09 सितंबर 1994 में इनके धन भाव में गोचर में गुरु, चंद्र, शुक्र व राहु स्थित थे। गोचर में लग्नेश बुध उच्च राशिस्थ था। गोचर का मंगल दशम में तथा शनि लग्न से छठे भाव में स्थित था। इस दिन तेंदुलकर ने एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट मैच में अपना पहला शतक बनाया।

वर्ष 1998 में शुक्र की महादशा तथा मंगल की अंतर्दशा के समय तेंदुलकर ने लगातार तीन शतक बनाए।

वर्ष 1999 में नीच के शनि के अष्टम भाव पर गोचर के समय तेंदुलकर को पीठ का दर्द रहने लगा तथा विश्व कप के दौरान इनके पिता प्रोफेसर रमेश तेंदुलकर का देहांत हो गया। 23 अगस्त, 1999 तक वर्षारंभ से ही गोचर के मंगल व शनि के बीच परस्पर दृष्टि योग बना हुआ था, जिसका प्रभाव अष्टम भाव पर प्रतिकूल था तथा पिता के कारक सूर्य व पिता के भाव स्वामी (नवमेश) शुक्र भी इस प्रतिकूल गोचरीय प्रभाव से पीड़ित थे।

अप्रैल 1998 से वर्ष 2000 तक शनि नीच राशिस्थ होकर अष्टम भाव को प्रभावित करता रहा। इस समय तेंदुलकर को पीठ दर्द हुआ, पिता की मृत्यु हुई, इन्हें भारतीय क्रिकेट टीम की कप्तानी सौंपी गई लेकिन कप्तान के रूप में असफल रहे, इनकी तीव्र आलोचना भी हुई और अंततः इ्रन्होंने कप्तान का पद छोड़ दिया।

वर्ष 2001 में शनि व गुरु का गोचरीय प्रभाव इनके भाग्य भाव में हुआ और इन्होंने फिर से सफल वापसी की। इनके लिए 2002 का वर्ष भी शुभ रहा। 2003 के विश्व कप में इन्होनें 673 रन बनाए और इन्हें मैन ऑफ द सीरीज का पुरस्कार मिला। इस प्रकार वर्ष 2003 में तेंदुलकर के लिए शनि की दशम भाव में ढैया तथा गोचर के गुरु का उच्च राशिस्थ होकर जन्मकुंडली के लाभ भाव, लाभेश, पराक्रम, दशम से दशमेश लग्नेश व दशमेश को प्रभावित करना अत्यंत लाभकारी सिद्ध हुआ। 2003 से 2008 तक तेंदुलकर का प्रदर्शन लगातार श्रेष्ठ होता गया और इन्होंने अनेक कीर्ति स्तंभ अर्जित किए। वर्ष 2009 में तेंदुलकर के बेमिसाल प्रदर्शन से सभी आश्चर्यचकित हैं। इस समय गोचर में चंद्र से ग्यारहवें भाव में होने के कारण शनि श्रेष्ठ है तथा जन्म लग्न, लग्नेश व दशमेश बुध सभी को प्रभावित कर रहा है।

यदि कुंडली में श्रेष्ठ योग होने के कारण कुंडली विशेष बलवान हो जाए तो प्रतिकूल दशाएं जातक को अधिक हानि नहीं पहुंचा सकतीं तथा श्रेष्ठ दशाएं व श्रेष्ठ गोचर जातक को बुलंदी के शिखर पर पहुंचा सकता है। वर्ष 2011 के उत्तरार्द्ध की गोचरीय स्थिति का तथा उस समय की महादशा का विश्लेषण करने से प्रतीत होता है कि क्रिकेट का यह महानायक अभी और करिश्मे दिखाएगा।

ज्योतिष ज्ञान

  • अष्टम भाव के राजयोग से गुप्त ज्ञान, अद्वितीय प्रतिभा व ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।

  • शनि के गोचर में श्रेष्ठ होने की स्थिति में लग्न, लग्नेश और दशमेश तीनों के प्रभावित होने पर विशेष ख्याति लाभ होता है।

  • राजयोग में सहायक ग्रह की महादशा विशेष लाभकारी सिद्ध होती है - जैसे प्रस्तुत कुंडली में शुक्र की।

  • शनि और मंगल का परस्पर दृष्टि योग अनिष्टकारी सिद्ध होता है - जैसे तेंदुलकर की कुंडली में १९९९ के वर्षारंभ से अगस्त तक के गोचर में।

  • नीच के शनि का लग्न से अष्टम भाव में गोचर कष्ट, असफलता, स्वास्थ्य संबंधी परेशानी तथा मानहानि करवाता है।

  • अनेक नीच व उच्च ग्रह पत्री में नीच भंग राजयोग बनाते हैं।

सचिन को कुछ मत कहो - राकेश अचल

विवाद

शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस महान क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर को लेकर राजनीति कर रहे है। यह ठीक नहीं है। सचिन तेंदुलकर महाराष्ट्र का ही नहीं बल्कि पूरे राष्ट्र का गौरव है, वे राजनीति के लिए कतई नहीं बने है।

शिवसेना मराठी मानस होते हुए भी सचिन रमेश तेंदुलकर से इसलिए नाराज है क्योकि सचिन ने सेना के सुर में सुर नहीं मिलाया। मराठी और महाराष्ट्र से ऊपर राष्ट्र को रखा। यह सचिन ही कर सकते है। वे राष्ट्र और महाराष्ट्र तथा मराठी, हिंदी के महत्व को समझते है।

मराठी में शपथ न लेने पर सेना का क्लोन मन से सपा विधायक अबू आजमी पर तो हाथ उठा सकती है लेकिन सचिन तेंदुलकर पर नहीं। दोनों ठाकरे सेनाओ को पता है कि सचिन की होना उनकी सेनओ से कही ज्यादा बडी और शक्तिशाली है। सचिन का नायकत्व किसी भी कार्टूनिस्ट से कही ज्यादा बड़ा है। सचिन को बोलने के लिए किसी सामना जैसे माउथ पीस की जरूरत नही है सचिन कम, उनका बल्ला ज्यादा बोलता है।

भारतीय रेल ने दूरतों नाम की रेल का लोकर्पण किया तो सचिन प्रेमी राकपा ने दूरन्तों का नाम सचिन के नाम पर रखने की मांग कर डाली। राकांपा की इस मांग के पीछे सचिन प्रेम है या राजनीति यह खोज का विषय है किंतु शिवसेना को तो यह राजनीति है लगी। इसीलिए उन्होने राकांपा की मांग का विरोध करते हुए सचिन को भी छोटा बनने की घटिया कोशिश कर डाली।

दुर्भाग्य देखिए कि शिवसेना वाले मीडिया को भगवान नहीं मानते और उनके माउथपीस सामना के संपादक संजय राउत सचिन को महान नहीं मानते। उस सचिन को जिसकी महानता को पूरी दूनिया सलाम करती है।

मुझे नही लगता कि सामना में लिखी ऊट पटांग टिप्पणी से सचिन तेंदुलकर का कुछ नुकसान होने वाला है। राउत को अपने लिखे पर भरोसा है तो वे सबसे पहले शिवसेनिको को सचिन का क्रिकेट देखने से मना कर देखे। असलियत का पता चल जाएगा।

सचिन को लेकर शिवसेना द्वारा शुरू की गई राजनीति से सचिन के साथ साथ उनके असंख्य प्रशांसक भी आहत हुए है। इनमें मराठी भी है और गैर मराठी भी। इसलिए बेहतर तो यही है कि शिवसेना पहले राजनीति का मतलब समझे फिर राजनीतिक व्यवहार करना सीखे। गुण्डे-मवालियों की भाषा और उन्ही जैसा व्यवहार कम से कम भारतीय राजनीति का हिस्सा तो नही हो सकता।

पिछले कुछ वर्षो में शिवसेना और उसके क्लोन मनसे की जो गतिविधिया रही है उनसे साबित हो गया है कि महाराष्ट्र की यह सेनाऐ बसपा के जातिवादी चरित्र से भी ज्यादा जहरीली और राष्ट्रघाती है। वोटों की खातिर केंद्र और राज्यों की सरकारें भले ही इन घातक संगठनों पर रोक न लगाएं, किंतु महाराष्ट्र की सुस्ंकारित जनता को तो इनका बहिष्कार करना ही चाहिए। इस पूरे विवाद में हम सचिन रमेश तेंदुलकर के सयंम की सराहना करना चाहते है कि उन्होने कोई प्रतिक्रिया नही की। उनके मौन ने ही ठाकरे सेना का पानी उतार दिया। सेना की टिप्पणी का न शिव सैनिको पर असर हुआ न मराठी मानस परं सब जानते है कि सचिन मराठी बाद मे है पहले सच्चे भारतीय है। उन तमाम सच्चे भारतीयों की तरह जो किसी सेना का अंग नही है। जिन्हे कोई ठाकरे निर्देशित नहीं करते।

इस देश ने बीते सालों में कितने ही भाषायी आंदोलन और भाषा के आधार पर बने राजनीतिक संगठन देखे है लेकिन कोई भी अजर-अमर नहीं हो सका। हिंदी का विरोध कर दस पांच तो सबकी राजनीति चली, लेकिन बाद मे सब धूल मे मिल गए। हिंदी से अलग रहकर न आज देष की राजनिति जीवित रह सकती है, न अर्थ व्यवस्था। समाज तो हिंदी के बिना रह ही नही सकता। कोई भी भाषा और क्षेत्र हो, हिंदी सबके लिए संपर्क की भाषा है। विचार विमर्श का माध्यम है। हिंदी की अस्मिता मराठी की अस्मिता से कतई अलग नहीं है, इसलिए जागो, सैनिकों जागो। (भावार्थ)

सफलता का नया सोपान स्थापित करने वाले मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर भी फ़िल्म में एक्टिंग करने को तैयार है. बॉलीवुड की नई पारी को उन्होंने कमाई के लिए नही शुरू किया है, फ़िर भी उनके सिल्वर स्क्रीन पर पदार्पण को लेकर चारो दिशाओं में जबरदस्त उत्साह है.

बॉलीवुड और क्रिकेट का रिश्ता दशको पुराना है जिसका आधार चाहे क्रिकेटरों और फिल्मी नायिकाओं के प्रेम संबंध रहे हो या फ़िर खिलाडियों का फिल्मो में अभिनय! भले ही क्रिकेट के दिग्गजों को मिली सफलता ऊंट के मुंह में जीरा वाली कहावत को चरितार्थ करती हो लेकिन इनको लेकर बॉलीवुड में गर्मजोशी का जो आलम रहता है, वह बेहद काबिलेगौर है! हाल-फिलहाल सिल्वर स्क्रीन पर वह दिग्गज खिलाडी कदम रखने जा रहा है, जिसके बल्ले ने पिछले 18 वर्षो से विश्व क्रिकेट पटल पर जबरदस्त तहलका मचा रखा है और तकरीबन क्रिकेट के अधिकांश रिकोर्ड उसका ही दामन थामे हुए है! मृदुल व्यवहार और सामाजिक कार्यो में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की उसकी आदत ने तो लाखो-करोडो लोगो को पहले ही अपना मुरीद बना रखा है और अब क्रिकेट का सच्चा भक्त अपनी धार्मिक आस्था को फ़िल्म के माध्यम से व्यक्त करने को तैयार है! जी हाँ, अब मास्टर ब्लास्टर सचिन रमेश तेंदुलकर बॉलीवुड की पिच पर उतरने की हामी भर चुके है और उनकी बॉलीवुड की पारी का सभी को बेसब्री से इंतजार है!
टेस्ट और एकदिवसीय में रिकोर्डो का अंबार लगाने वाले मुम्बईया उस्ताद सचिन तेंदुलकर हिंदू देवता गणेश पर बनने वाली विध्नहर्ता श्री सिध्दिविनायक नामक फ़िल्म में अपने अभिनय कौशल के जौहर बिखेरेंगे! इस फ़िल्म के निर्माण की जिम्मेदारी मुम्बई स्थित सिध्दिविनायक मन्दिर की देखरेख करने वाला ट्रस्ट निभा रहा है! प्रोडक्शन का काम देख रहे कंपनी के मुखिया राजीव संघवी के मुताबिक सचिन की फ़िल्म में भूमिका छोटी होगी और वह फ़िल्म में गीत में दिखाई देंगे, जिसके लिए उन्हें मेहनताना नही मिलेगा! सचिन की सिल्वर स्क्रीन पर उतरने की पुष्टि उनके जनसंपर्क कंपनी ने भी कर दी है! इस फ़िल्म में बॉलीवुड के शहंशाह अमिताभ बच्चन अपनी आवाज देंगे, जिनकी सचिन के साथ नजदीकिया जगजाहिर है! मैदान पर चौके-छक्के का लुत्फ़ उठाने वाले तमाम खेलप्रेमियों को सचिन की इस नई पारी का पूरी उत्सुकता के साथ इंतजार है, लेकिन रील के माध्यम से ख़ुद को साबित करने की कड़ी चुनौती भी सचिन के सम्मुख मुंह बांहे खड़ी है, जिसका आधार पूर्व में जोर आजमाईश कर चुके खिलाडियों की कमजोर अभिनय क्षमत या असफलता है! सचिन से पहले भारतीय टेस्ट टीम के कप्तान अनिल कुंबले ने भी 'मीरा बाई नॉट आउट' में मेहमान भूमिका का निर्वाह किया है! प्रीतिश नंदी कम्यूनिकेशन बैनर के तले बनी इस फ़िल्म के निर्माता चन्द्रकान्ता कुलकर्णी है! कुंबले को इस फ़िल्म में क्रिकेट कमेंटेटर मंदिरा बेदी,महेश मांजरेकर,अनुपम खेर और चारु शर्मा के साथ ख़ुद को क्रिकेट के मैदान की तरह रुपहले पर्दे पर खरा साबित करने का मौका मिला है!
पुराना है सिलसिला
क्रिकेट खिलाडियों ने बेशक ऑन द फील्ड और ऑफ़ द फील्ड अपना जलवा बिखेरा हो लेकिन बॉलिवुड उन्हें कभी रास नही आया! एकाध खिलाड़ी की कामयाबी को अपवाद मान लिया जाए तो अधिकांश को बॉलीवुड में ख़ुद को स्थापित करने की दिशा में मुंह की खान पड़ी है! बहरहाल, क्रिकेटरों का बॉलीवुड के प्रति पहला प्यार सलीम अजीज दुर्रानी के रूप में नजर आया था! 1973 में दुर्रानी ने बी.आर.इशारा की चरित्र में अबिनय किया जो कि बॉलीवुड की चुलबुली अदाकारा परवीन बॉबी की पहली फ़िल्म थी! ब्लैक एंड व्हाइट इस फ़िल्म में सबकुछ औसत था सिवाय बॉबी के, क्योकि बॉलीवुड को उनके रूप में एक प्रतिभावान हिरोइन मिली! मैदान पर धमाल मचाने वाले दुर्रानी अपने अभिनय से कोई छाप नही छोड़ सके जबकि उनसे सभी को सार्थक अभिनय की उम्मीद थी! पूरी तरह बॉलीवुड हीरो के रूप में रुपहले पर्दे पर कदम रखने वाले दुर्रानी कोइस फ़िल्म में काम करने के एवज में 80000 रुपये मिले थे जो उस दौर में काफी बड़ी रकम थी! इस फ़िल्म के बाद दुर्रानी ने 'आखिरी दिन और पहली रात' में भी काम किया लेकिन ये फिल्म सिनेमाघरो में दस्तक नही दे सकी!
टीम इंडिया द्वारा 1983 विश्व कप जीतने का खुमार लोगो के सिर चढ़कर बोल रहा था और इसी दौरान यानि 1985 में कभी अजनबी थे संदीप पाटिल, सयैद किरमानी और लिटिल मास्टर सुनील गावस्कर ने सिल्वर स्क्रीन पर पदार्पण किया! इस फ़िल्म में पाटिल ने मुख्य भूमिका निभाई थी जबकि किरमानी और गावस्कर को भी दमदार रोल मिला था! बहरहाल, काफ़ी प्रसार-प्रचार के बावजूद यह फिम बॉक्स ऑफिस पर दम तोड़ गई! हालांकि किरमानी ने अपने दमदार अभिनय से बॉलीवुड में भी सफलता की उम्मीद बंधाई थी, पर ऐसा न हो सका! इस फ़िल्म में विंडीज के महान खिलाडी क्लाइव लोयड ने भी मेहमान की भूमिका निभाई थी! सुनील गावस्कर ने 'कभी अजनबी थे' के अतिरिक्त मराठी फ़िल्म 'सावली प्रेमाची', 'जाकोल' और 1988 में हिन्दी फ़िल्म 'मालामाल' में हाथ आजमाए, पर वह सफल नही हो सके! यानि मैदान में हरदम छाया रहने वाले ये जांबाज बॉलीवुड की पिच पर लंबा नही टिक सका!
दिल में बसा सचिन का एक लम्हा
Misc
आसमान की ओर देखकर बुदबुदाते सचिन। एक हाथ में बैट और दूसरे में हेलमेट लिए हवा में हाथ उठाए सचिन। हेलमेट को चूमते सचिन। और इन लम्हों के बीच क्रिकेट के शिखर पर काबिज सचिन। ये लम्हे बार बार नहीं आते। किसी भी क्रिकेटर की ज़िंदगी में नहीं। लेकिन,सचिन रमेश तेंदुलकर इन पलों से गुज़रे तो उन्होंने शिद्दत से उसे जीया।
पीटर सीडल की गेंद पर सचिन तीन रनों के लिए दौड़े तो यह सिर्फ तीन रन नहीं थे। ये सचिन की ज़िंदगी की मेहनत को एक नयी उपलब्धि में गढ़ते तीन रन थे। ब्रायन लारा के विश्व रिकॉर्ड को तोड़ते तीन रन थे। टेस्ट क्रिकेट में सचिन को सबसे ज्यादा रनों के शिखर पर बैठाते तीन रन थे। सचिन तेंदुलकर इन तीन रनों के साथ 11,955 रनों पर पहुंच गए। ब्रायन लारा के सर्वाधिक टेस्ट रनों 11,953 से दो रन ज्यादा। 22 गज की पिच पर यह तीन रन पूरे हुए ही थे कि मैदान पर वक्त ठहर गया। दोपहर के करीब पौने तीन बजे सचिन ने इस शिखर को छुआ तो छोटे कद के मास्टर की छोटी परछाई पिच पर दिखी,लेकिन क्रिकेट की दुनिया में यह कभी न मिटने वाली छाप छोड़ गई। ड्रेसिंग रुम में बैठे तमाम भारतीय खिलाड़ी खड़े होकर क्रिकेट के इस भगवान को इस नयी मंजिल पर पहुंचने की बधाई दे रहे थे,तो कंगारु खिलाड़ी तो खुद मैदान में इस अहम पल के गवाह थे। कई दर्शक इस लम्हे को कैमरे में कैद कर रहे थे,तो कई सचिन की तस्वीरों को निगाहों में फ्रीज कर लेना चाहते थे। कभी न भूलने वाली तस्वीरों को।
दीवाली से करीब दो हफ्ते पहले ही मोहाली भी इस पल को यादगार बनाने को बेताब था। स्टेडियम के ऊपर आसमान में करीब पांच मिनट तक जमकर आतिशबाजी हुई। सचिन की इस महान उपलब्धि का जश्न मनाती हुई। इन पलों में खेल थम गया,लेकिन किसी को कोई शिकायत नहीं थी। सचिन तेंदुलकर को हर कोई बस इसी रुप में देखते रहना चाहता था।
क्रिकेट की किताब के सैकड़ों रिकॉर्ड सचिन तेंदुलकर के नाम हैं। लेकिन,ये रिकॉर्ड उन सभी में अलग और खास है। एक तो,हाल में इस रिकॉर्ड की दहलीज पर खड़े सचिन को दहलीज पार करने में खासा वक्त लगा। लेकिन, बड़ी बात यह है कि टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा रनों का मतलब सिर्फ एक वर्ल्ड रिकॉर्ड नहीं है, बल्कि इस खेल में भारतीय हुनर और काबलियत का लोहा मनवाना है।
एक दौर में इंग्लैंड और आस्ट्रेलिया जैसी टीमें इस देश में अपने दोयम दर्जे की टेस्ट टीम भेजती थीं क्योंकि यहां खेल का कोई स्तर नहीं था। लेकिन, सचिन तेंदुलकर और उनसे पहले कई भारतीय खिलाड़ियों ने इस मिथक को न केवल तोड़ा,बल्कि सफलता की नयी दास्तां लिखीं। सचिन तेंदुलकर सुनील गावस्कर के बाद दूसरे भारतीय हैं,जो सफलता के इस पायदान पर खड़े हुए हैं। दिलचस्प यह कि सचिन ने जब रिकॉर्ड तोड़ा तो इस रिकॉर्ड की दहलीज छू चुके सुनील गावस्कर और एलन बॉर्डर जैसे दिग्गज भी इन लम्हों को डूबकर देख रहे थे।
आखिर, ये कभी न भूलने वाले पल हैं। सभी के लिए। अगर आप इन लम्हों को टेलीविजन पर देखने से चूक गए हैं,तो कोशिश कीजिए। इन्हें देखिए,और बसा लीजिए अपने दिलों-दिमाग में क्योंकि क्रिकेट के भगवान को इस रुप में देखना बार-बार नसीब नहीं होता।

सचिन ये तूने क्या कर दिया ?

“क्रिकेट में नाम नहीं खिलाडी खेलता है.” जब से इस खेल को समझना और देखना शुरु किया यही सुना था, मगर कल जयपुर के सवाई मानसिंह स्टेडियम में यह बात गलत दिखी. कल का मैच बेहद रोमांचक था. एक आसान सी लगने वाली जीत को कैसे मुश्किल बनाते हैं यह जानने के लिए मैच की हाईलाइट देखना मत भूलिएगा. पहले तो बात करते हैं इस पोस्ट की मुख्य वजह से. कल भारत-द. अफ्रीका के बीच वनडे मैच चल रहा था. भारत ने यंगिस्तान के सैनिक रैना, कार्तिक और कोहली की शानदार पारियों की बदौलत अपने निर्धारित 50 ओवरों में 298 रन बनाए(बाकी के खिलाड़ी शायद पवेलियन जाने की जल्दी में थे).


हीरो या ...............

हीरो या ...............


बारी आयी द. अफ्रीका की. पहले तो भारतीय गेंदबाजो ने ऐसा दबदबा बनाया कि एक समय पर स्कोर बोर्ड 7/180 पर था. पर इसके बाद जो हुआ उसने भारत की पुरानी आदत की याद दिला दी. विपक्षी कप्तान कैलिस ने 89 रनों की पारी खेल साफ कर दिया कि वह जल्दी हार मानने वाले नहीं और सांस अटकाने का असली काम किया वायेन पार्नेल व डेल स्टेन ने. एक रन से जैसे तैसे जीत मिली. खैर अंत भला तो सब भला. मगर मेरे दिमाग में एक चीज घर कर गई, आखिर यह एक रन बचाया किसने ?

सबका जवाब था जी सचिन ने. सचिन ने जिस तरह डाइव लगा कर एक रन बचाया वह काबिले तारीफ था. मगर साथ ही मेरी नजर में विवादास्पद भी. टी.वी. रिपले से साफ लग रहा था कि सचिन से चूक हो गई है और निश्चित ही इसे बॉउण्ड्री करार दी जाएगी मगर थर्ड अंपायर को न जाने क्या संदेह था जो उन्होंने बेनेफिट ऑफ डाउट दे दिया. शायद इसके पीछे वजह थी डाइव लगाने वाले शख्स का नाम सचिन था सचिन रमेश तेंदुलकर. वह शख्स जिसे भारत के क्रिकेट दीवाने भगवान से कम नहीं समझते. जिस के नाम आज बल्लेबाजी के सभी रिकोर्ड हैं.

मैं सचिन के खिलाफ टिप्पणी नही कर रहा हूं बल्कि अपनी आवाज , अपने ब्लॉग से समाज की एक आदत को इंगित कर रहा हूं जो नाम बडा होने पर नियमों को बदलने में गुरेज नही करता. कल एक गलत फैसले की वजह से द. अफ्रीका मैच हार गया. एक रन के मायने शायद सचिन से ज्यादा कोई नही जानता. वनडे कैरियर में 4 बार शतक से महज 1 रन चूक जाने वाले सचिन को शायद यह विधाता का पुरस्कार हो मगर एक खेलप्रेमी की नजर में तो इसे पक्षपात कहा जाएगा.
आपको क्या लगता है ?

जादू के 20 साल

सचिन तेंदुलकर...क्रिकेट के प्रशंसकों की आस्था के प्रतीक हैं. मैदान पर जब वह उतरते हैं तो उनकी प्रतिभा, लय, समर्पण के साथ करोडों लोगों की दुआएं होती हैं. लंबे समय से उन्होंने भारत की उम्मीदों का भार अपने कंधों पर ढोया है, न जाने कितने रिकॉर्डों को संजोया है.

तेंदुलकर की कितनी ही पारियां आज भी जीवंत हो उठती हैं जो हमें मैदान के उस शोर, तनाव में ले जाती हैं जहां सिर्फ़ तेंदुलकर को क्रीज़ पर देखकर ही शांति का अनुभव होता था. फिर इस बात से कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता कि उन में से कुछ पारियां सालों पहले खेली गई थीं.

तेंदुलकर आज भी उसी शिद्दत से मैदान पर खेल रहे हैं, कीर्तिमान क़ायम कर रहे हैं. सचिन के खेल को देख-देखकर एक पूरी पीढ़ी युवा हुई है और शायद आने वाली पीढ़ियों को बता कर ये पीढ़ी गर्व करेगी कि उन्होंने सचिन को खेलते हुए देखा है.

15 नवंबर 1989 को पाकिस्तान के ख़िलाफ़ अपने करियर की शुरुआत करने वाले सचिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपने 20 साल पूरे कर रहे हैं. उनकी इस उपलब्धि पर डॉयचे वेले की विशेष प्रस्तुति.

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भगवान् को लेकर अक्सर चर्चाये होती ही रहती है, कोई उस सर्वशक्तिमान को किसी रूप में पूजता है तो कोई उसकी किसी और तरीके से इबादत करता है, पर कुछ atheist लोगो को छोड़ कर लगभग सभी मानते है कि भगवान् है और उसके कई रूप है और वो समय समय पर अलग अलग रूपों में अपनी अस्तित्व का प्रमाण देता है.

आज २४ फ़रवरी २०१० का दिन महत्वपूर्ण था क्योकि आज अपनी ममता दीदी रेल बजट लाने वाली थी, अब किसी को यह बताने कि जरूरत नहीं है कि अमूमन रेल बजट देश के सालाना बजट के पहले आता है और देश के १८ मिलियन से अधिक लोग जो यात्रा करने के लिए इस कि सेवा का उपयोग करते है वो दो हफ्ते पहले ही न्यूज़ पेपर और न्यूज़ चेनल्स पर इसके लिए अपना समय देते रहते है.

उन तमाम १८ मिलियन लोगो में से मैं भी एक हूँ जो काफी बेसबरी से रेल बजट के लिए आज सुबह से ही परेशान था और जब दोपहर के बाद मैं अपनी जिज्ञासा कि शांति के लिए कुछ वेब साईट देख रहा था अभी एक

मैंने आज भगवान् को देखा

छोटा सा अपडेट देखा कि अरे आज तो इंडिया और साउथ अफ्रीका का वन डे मैच है और इंडिया के २ विकेट गिर चुके है, मैंने अपनी जिज्ञासा के अनुरूप यह जानने कि कोशिश कि किसे कितना रन बनाया है तो पाया कि सचिन १६० रन बना कर क्रीज पर है और अभी ११ ओवर और होने है.

मैं बचपन से ही सचिन का फैन रहा हूँ और मैं क्या मेरे ऐसे और भी बहुत है जिन्होंने सचिन को खेलता हुआ देखकर क्रिकेट खेलना सीखा और आज सचिन के साथ भारतीय क्रिकेट टीम का हिस्सा है, सचिन जब पहली बार इंडियन टीम का हिस्सा बन कर पाकिस्तान गए थे तो एक मैच के दौरान महान पाकिस्तानी स्पिन बोलर अब्दुल कादिर ने बौलिंग करते हुए सचिन से पुछा था क्यों बच्चे बाल समझ में आयी. सचिन उस समय मुस्कुराये और अब्दुल कादिर के अगले ओवर में लगातार तीन बालो पर तीन छक्के जड़ डाले.

समय बदला सचिन वेंडर बॉय से मास्टर बलास्टर हो गए और क्रिकेट ही नहीं बल्कि विज्ञापन जगत में भी उनकी तूती बोलने लगी. सभी उनके मुरीद थे पर कुछ समय बाद जब टेनिस एल्बो के प्रॉब्लम हुई और क्रिकेट और ऊँचे स्कोर से सचिन की दूरी बढती गयी सर्वप्रथम विज्ञापन जगत ने किनारा किया, विज्ञापन जगत प्रतिस्पर्धा जगत का अजीब रूप है जिसे ऍम बी ऐ डिग्री धारक और कुछ रेटिंग संस्थाए निर्धारित करती है और उनका ये मानना है की केवल चढ़ते सूरज को ही सलाम करना चाहिए. और हम फैन भी अजीब है भले हम अपने जीवन में बहुत अच्छा ना कर रहे हो पर हमारा हीरो हमेशा सेंचुरी ही बनाये ऐसे आशा पाल कर रहते है. इस दौरान कोई लोगो ने सचिन कि आलोचना करने शुरू कर दी, तो कई लोगो ने यहाँ तक कह डाला कि क्रिकेट यंग ब्लड गेम है और सचिन अब बूढ़े हो चले है इसके पहले कि उनको टीम से निकला जाये उनको खुद ही संन्यास ले लेना चाहिए.

इन आलोचनाओ और खुद को एक ख़राब दौर में पाकर भी सचिन ने ना तो अपना हौसला छोड़ा और ना ही अपना विश्वास, विश्वास वस्तुतः और कुछ नहीं है यह एक आस्था का प्रतिक है जो हमे यह सिखाता है कि “तुम कर्म करो और मुझ पर विश्वास रखो मैं तुम्हे निराश नहीं होने दूंगा” क्योकि मैं ईश्वर के रूप में हर जीवित प्राणी में निवास करता हूँ.

सचिन ने बड्ती उम्र और आलोचनाओ के बीच में अपने कुछ गोल को निर्धारित किया और तमाम आलोचनाओ को दरकिनार करते हुए बस एकाग्र हो अपना स्वाभाविक खेल खेलने का प्रयास करते रहे. मैं हाल कि उनकी कुछ इन्निंग्स देखी है और ऐसा पाया था की १०० रन पूरे करने के बाद उनकी निगाह सीधे २०० के स्कोर पर ही रहती थी, लेकिन अगर आप उनका गेम देखे तो कही से यह नहीं लगता था की वो बस अपने लिए खेल रहे है. आज भी जब वे २०० रन बने के करीब थे तो भी वे उतावले नहीं दीखे जब की उन्होंने धोनी को जयादा खेलने का मौका दिया . और जब ४९ वे ओवर में २०० रन बनाने वाले पहले क्रिक्केटर होने का गौरव प्राप्त किया तो अपने दोनों हाथो को आकाश की ओर उठा कर भगवान् को शुक्रिया देना नहीं भूले.

मानव सभ्यता के इतिहास में धर्म या मजहब ने सबसे महत्वपुर्ण काम किया है की इससे ने लोगो को एक दुसरे से जोड़ा है चाहे माध्यम कोई रहा हो पर सन्देश एक ही था की सतत साथ रहो और एक दुसरे के ख़ुशी और गम को शेयर करो . हमारे देश में जहाँ हर चार कोश पर पानी और भाषा बदल जाते है है वहां पर लोगो को आपस में जोड़ने का काम किया है क्रिकेट ने जो हिंदुस्तान के लोगो के लिए मजहब से कम नहीं है और अगर क्रिकेट मजहब है तो सचिन रमेश तेंदुलकर किसी भी तरह भगवान् से कम नहीं जो यह कहने में कोई भी संकोच नहीं करता की मैं मुंबई के तरफ से नहीं खेलता हूँ मैं हिंदुस्तान की ओर से खेलता हूँ जिसका एक छोटा सा हिस्सा भर मुंबई है. कल जब न्यूज़ पेपर पर फ्रंट पेज पर ख़बरे छपेंगी तो लगभग सभी १८ मिलियन रेल यात्रियो के मन में रेल बजट से जयादा उत्सुकता सचिन के बारे में होगी और सभी न्यूज़ पेपरों की पहली न्यूज़ सचिन का दोहरा शतक ही होगा न की ममता दीदी का रेल बजट . मैं खुशकिस्मत हूँ की मैंने भगवान् को आज फिर देखा है सचिन रमेश तेंदुलकर के रूप में.