आज २४ फ़रवरी २०१० का दिन महत्वपूर्ण था क्योकि आज अपनी ममता दीदी रेल बजट लाने वाली थी, अब किसी को यह बताने कि जरूरत नहीं है कि अमूमन रेल बजट देश के सालाना बजट के पहले आता है और देश के १८ मिलियन से अधिक लोग जो यात्रा करने के लिए इस कि सेवा का उपयोग करते है वो दो हफ्ते पहले ही न्यूज़ पेपर और न्यूज़ चेनल्स पर इसके लिए अपना समय देते रहते है.
मैंने आज भगवान् को देखा
मैं बचपन से ही सचिन का फैन रहा हूँ और मैं क्या मेरे ऐसे और भी बहुत है जिन्होंने सचिन को खेलता हुआ देखकर क्रिकेट खेलना सीखा और आज सचिन के साथ भारतीय क्रिकेट टीम का हिस्सा है, सचिन जब पहली बार इंडियन टीम का हिस्सा बन कर पाकिस्तान गए थे तो एक मैच के दौरान महान पाकिस्तानी स्पिन बोलर अब्दुल कादिर ने बौलिंग करते हुए सचिन से पुछा था क्यों बच्चे बाल समझ में आयी. सचिन उस समय मुस्कुराये और अब्दुल कादिर के अगले ओवर में लगातार तीन बालो पर तीन छक्के जड़ डाले.
समय बदला सचिन वेंडर बॉय से मास्टर बलास्टर हो गए और क्रिकेट ही नहीं बल्कि विज्ञापन जगत में भी उनकी तूती बोलने लगी. सभी उनके मुरीद थे पर कुछ समय बाद जब टेनिस एल्बो के प्रॉब्लम हुई और क्रिकेट और ऊँचे स्कोर से सचिन की दूरी बढती गयी सर्वप्रथम विज्ञापन जगत ने किनारा किया, विज्ञापन जगत प्रतिस्पर्धा जगत का अजीब रूप है जिसे ऍम बी ऐ डिग्री धारक और कुछ रेटिंग संस्थाए निर्धारित करती है और उनका ये मानना है की केवल चढ़ते सूरज को ही सलाम करना चाहिए. और हम फैन भी अजीब है भले हम अपने जीवन में बहुत अच्छा ना कर रहे हो पर हमारा हीरो हमेशा सेंचुरी ही बनाये ऐसे आशा पाल कर रहते है. इस दौरान कोई लोगो ने सचिन कि आलोचना करने शुरू कर दी, तो कई लोगो ने यहाँ तक कह डाला कि क्रिकेट यंग ब्लड गेम है और सचिन अब बूढ़े हो चले है इसके पहले कि उनको टीम से निकला जाये उनको खुद ही संन्यास ले लेना चाहिए.
इन आलोचनाओ और खुद को एक ख़राब दौर में पाकर भी सचिन ने ना तो अपना हौसला छोड़ा और ना ही अपना विश्वास, विश्वास वस्तुतः और कुछ नहीं है यह एक आस्था का प्रतिक है जो हमे यह सिखाता है कि “तुम कर्म करो और मुझ पर विश्वास रखो मैं तुम्हे निराश नहीं होने दूंगा” क्योकि मैं ईश्वर के रूप में हर जीवित प्राणी में निवास करता हूँ.
सचिन ने बड्ती उम्र और आलोचनाओ के बीच में अपने कुछ गोल को निर्धारित किया और तमाम आलोचनाओ को दरकिनार करते हुए बस एकाग्र हो अपना स्वाभाविक खेल खेलने का प्रयास करते रहे. मैं हाल कि उनकी कुछ इन्निंग्स देखी है और ऐसा पाया था की १०० रन पूरे करने के बाद उनकी निगाह सीधे २०० के स्कोर पर ही रहती थी, लेकिन अगर आप उनका गेम देखे तो कही से यह नहीं लगता था की वो बस अपने लिए खेल रहे है. आज भी जब वे २०० रन बने के करीब थे तो भी वे उतावले नहीं दीखे जब की उन्होंने धोनी को जयादा खेलने का मौका दिया . और जब ४९ वे ओवर में २०० रन बनाने वाले पहले क्रिक्केटर होने का गौरव प्राप्त किया तो अपने दोनों हाथो को आकाश की ओर उठा कर भगवान् को शुक्रिया देना नहीं भूले.
मानव सभ्यता के इतिहास में धर्म या मजहब ने सबसे महत्वपुर्ण काम किया है की इससे ने लोगो को एक दुसरे से जोड़ा है चाहे माध्यम कोई रहा हो पर सन्देश एक ही था की सतत साथ रहो और एक दुसरे के ख़ुशी और गम को शेयर करो . हमारे देश में जहाँ हर चार कोश पर पानी और भाषा बदल जाते है है वहां पर लोगो को आपस में जोड़ने का काम किया है क्रिकेट ने जो हिंदुस्तान के लोगो के लिए मजहब से कम नहीं है और अगर क्रिकेट मजहब है तो सचिन रमेश तेंदुलकर किसी भी तरह भगवान् से कम नहीं जो यह कहने में कोई भी संकोच नहीं करता की मैं मुंबई के तरफ से नहीं खेलता हूँ मैं हिंदुस्तान की ओर से खेलता हूँ जिसका एक छोटा सा हिस्सा भर मुंबई है. कल जब न्यूज़ पेपर पर फ्रंट पेज पर ख़बरे छपेंगी तो लगभग सभी १८ मिलियन रेल यात्रियो के मन में रेल बजट से जयादा उत्सुकता सचिन के बारे में होगी और सभी न्यूज़ पेपरों की पहली न्यूज़ सचिन का दोहरा शतक ही होगा न की ममता दीदी का रेल बजट . मैं खुशकिस्मत हूँ की मैंने भगवान् को आज फिर देखा है सचिन रमेश तेंदुलकर के रूप में.

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