Wednesday, August 18, 2010

सचिन ये तूने क्या कर दिया ?

“क्रिकेट में नाम नहीं खिलाडी खेलता है.” जब से इस खेल को समझना और देखना शुरु किया यही सुना था, मगर कल जयपुर के सवाई मानसिंह स्टेडियम में यह बात गलत दिखी. कल का मैच बेहद रोमांचक था. एक आसान सी लगने वाली जीत को कैसे मुश्किल बनाते हैं यह जानने के लिए मैच की हाईलाइट देखना मत भूलिएगा. पहले तो बात करते हैं इस पोस्ट की मुख्य वजह से. कल भारत-द. अफ्रीका के बीच वनडे मैच चल रहा था. भारत ने यंगिस्तान के सैनिक रैना, कार्तिक और कोहली की शानदार पारियों की बदौलत अपने निर्धारित 50 ओवरों में 298 रन बनाए(बाकी के खिलाड़ी शायद पवेलियन जाने की जल्दी में थे).


हीरो या ...............

हीरो या ...............


बारी आयी द. अफ्रीका की. पहले तो भारतीय गेंदबाजो ने ऐसा दबदबा बनाया कि एक समय पर स्कोर बोर्ड 7/180 पर था. पर इसके बाद जो हुआ उसने भारत की पुरानी आदत की याद दिला दी. विपक्षी कप्तान कैलिस ने 89 रनों की पारी खेल साफ कर दिया कि वह जल्दी हार मानने वाले नहीं और सांस अटकाने का असली काम किया वायेन पार्नेल व डेल स्टेन ने. एक रन से जैसे तैसे जीत मिली. खैर अंत भला तो सब भला. मगर मेरे दिमाग में एक चीज घर कर गई, आखिर यह एक रन बचाया किसने ?

सबका जवाब था जी सचिन ने. सचिन ने जिस तरह डाइव लगा कर एक रन बचाया वह काबिले तारीफ था. मगर साथ ही मेरी नजर में विवादास्पद भी. टी.वी. रिपले से साफ लग रहा था कि सचिन से चूक हो गई है और निश्चित ही इसे बॉउण्ड्री करार दी जाएगी मगर थर्ड अंपायर को न जाने क्या संदेह था जो उन्होंने बेनेफिट ऑफ डाउट दे दिया. शायद इसके पीछे वजह थी डाइव लगाने वाले शख्स का नाम सचिन था सचिन रमेश तेंदुलकर. वह शख्स जिसे भारत के क्रिकेट दीवाने भगवान से कम नहीं समझते. जिस के नाम आज बल्लेबाजी के सभी रिकोर्ड हैं.

मैं सचिन के खिलाफ टिप्पणी नही कर रहा हूं बल्कि अपनी आवाज , अपने ब्लॉग से समाज की एक आदत को इंगित कर रहा हूं जो नाम बडा होने पर नियमों को बदलने में गुरेज नही करता. कल एक गलत फैसले की वजह से द. अफ्रीका मैच हार गया. एक रन के मायने शायद सचिन से ज्यादा कोई नही जानता. वनडे कैरियर में 4 बार शतक से महज 1 रन चूक जाने वाले सचिन को शायद यह विधाता का पुरस्कार हो मगर एक खेलप्रेमी की नजर में तो इसे पक्षपात कहा जाएगा.
आपको क्या लगता है ?

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